बाल सफेद हो रहे हों या गिर रहे हों ये देसी नुस्खें कर देंगे पक्का इलाज
डाँग-
गुजरात में आदिवासी नीम के बीजों के तेल को रात में बालों में लगाते है और
सुबह इसे धो लिया जाता है। सप्ताह में इस तेल से बालों पर कम से कम 2 बाल
मालिश करने की भी सलाह दी जाती है। पातालकोट (मध्यप्रदेश) के हर्बल जानकार
नारियल के तेल में नीम के बीजों को उबालते हैं और इस तेल से सप्ताह में दो
बार मालिश करने की सलाह देते हैं।
कुसुम के बीजों का चूर्ण और बबूल की छाल का चूर्ण, दोनों समान मात्रा में लेकर तवे पर भून
लिया जाता है। जलने की वजह से राख जैसा मिश्रण तैयार हो जाता है, इस
मिश्रण को नारियल या मोगरा के तेल के साथ मिलाकार सिर पर मालिश किया जाए तो
बालों की वृद्दि तेजी से होती है और यही फार्मुला गंजापन भी रोकने में मदद
करता है।
डाँग- गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकार इंद्रायण नामक पौधे की जडों को
गौ-मूत्र में कुचलते हैं और सिर पर लगाते हैं। इनके अनुसार प्रतिदिन ऐसा
करने से गंजापन नहीं आता और बालों की जडों को मजबूती भी मिलती है।
बालों की बेहतर सेहत और घने बनाने के लिए शंखपुष्पी के ताजे पौधों को सुखा
लिया जाए और चूर्ण तैयार किया जाए। इस चूर्ण को नारियल तेल में डालकर मध्यम
आँच पर 20-25 मिनिट तक गर्म किया जाए। जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छानकर
बालों पर लगाया जाए, यह बालों की जडों को मजबूती प्रदान करता है और इन्हें
घना भी करता है।
आँवले के फलों का चूर्ण लिया जाए और इसमें एक टमाटर कुचल कर मिला जाए, इन
दोनों को अच्छी तरह से मिलाकर सिर पर लगाकर 20 मिनिट तक मालिश किया जाए तो
बालों से डेंड्रफ दूर हो जाते हैं। ऐसा सप्ताह में कम से कम एक बार अवश्य
करना चाहिए।
बालों पर नारियल का ताजा पानी लगाकर हल्की हल्की मालिश करने से बालों का
रूखापन दूर होता है और इनके झडने का सिलसिला कम हो जाता है। कई इलाकों में
ताजे हरे नारियल के फल से निकाली गई मलाई को भी बालों पर हल्का हल्का रगडकर
मालिश करने की सलाह आदिवासी देते हैं। माना जाता है कि इन दोनो युक्तियों
को अपनाने से बालों की सेहत बेहतर हो जाती है।
पातालकोट में आदिवासी अनंतमूल की चाय तैयार करते हैं, माना जाता है कि
बालों की बेहतर सेहत के लिए यह चाय बडी कारगर है। इस चाय को तैयार करने के
लिए अनंतमूल की जडों के साथ कुछ मात्रा में सेमल की छाल भी मिला दी जाती है
और इसे पानी में डालकर खौलाया जाता है। ठंडा होने पर इसे छान लिया जाता है
और पी लिया जाता है। माना जाता है कि यह फार्मुला बालों की सेहत बेहतर
करता है और साथ ही बालों का असमय पकना भी रोकता है।
डाँग- गुजरात में आदिवासी गुडहल के लाल फूलों को नारियल तेल में डालकर गर्म
करते हैं और बालों पर इस तेल से मालिश की जाती है। कहा जाता है कि नहाते
वक्त बालों पर इस तेल को लगाया जाए और नहाने के बाद बालों को आहिस्ता
आहिस्ता सूती तौलिये से सुखा लिया जाए, और नहाने के बाद भी इस तेल को बालों
पर लगाया जाए, काफी तेजी से बालों की सेहत में सुधार आता है।
गुडहल के ताजे लाल फूलों को हथेली में कुचल लिया जाए और इस रस को नहाने के
दौरान बालों पर हल्का हल्का रगडा जाए, गुडहल एक बेहतरीन कंडीशनर की तरह
कार्य करता है।
मुनगा/ सहजन की पत्तियों को कुचलकर नहाने से पहले बालों में लगाया जाए तो
माना जाता है कि बालों से डेंड्रफ दूर करने में काफी मदद होती है।
मध्यप्रदेश के कई इलाकों में सहजन की पत्तियों का चूर्ण तैयार कर तेल में
मिलाकर रात सोने से पहले सिर में लगाने की बात की जाती है। माना जाता है कि
यह बालों में ताकत प्रदान करता है और अक्सर असमय पकने की प्रक्रिया को भी
रोक देता है।